कलम..

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Monday, 15 July 2013

जनता रुपी द्रौपदी






वोटर खड़ा कतार में वोट देने को है बेकरार 
मनन चिंतन करता कौन से और किस मंत्री 
के वायदे पर करूं ऐतवार 
सयासी गलियारों में जो गूँज थी वो उठती
आवाजें लगी लुभाने में 
चुनावों के मद्देनजर सारी पार्टियाँ उतरी
अब मैदानों में 
इधर देखो सत्ता में जो बरकरार सरकार है 
उसमें रोज होते घोटालों की बड़ी भरमार है 
उधर भाजपा में हिंदुत्व की होती जय जयकार है 
बाकि धर्मों को अपनाना शायद उनके लिए एक 
उपकार है 
धर्मनिरपेक्षता बनाम साम्प्रदायिकता 
चेहरा बनाम चेहरे की उडी आंधी है 
इधर नरेन्द्र मोदी तो उधर राहुल गाँधी है 
इन नेताओं को लगता है शायद जनता 
गूंगी बहरी और साथ में अंधी है 
बढती महंगाई की मार रोज झेल रहे 
आपदा पीड़ित राज्यों में लोग भूखों मर रहे 
आरोप प्रत्यारोप के बीच इन्हें जरा फ़िक्र नहीं 
बरसाती बारिश के नीचे कितने अनाज के 
बोरे सड़ रहे
कैसे नेता हैं ये देश के कैसा इनका शासन है 
जनता रुपी द्रौपदी का जैसे चीरहरण करता दुशासन है  

4 comments:



  1. राजनीति है सब, सोच बदलकर वोट करना होगा

    बहुत खूब, शुभकामनाये

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  2. बहुत खूब, शुभकामनाये

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